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बही लिखना, सनद लिखना (My Love)



बही लिखना, सनद लिखना
मेरी चाहत का कद लिखना।
मेरी बातों को तुम कीकर
और अपने लब शहद लिखना।।
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तुम्हें पाना नहीं फिर भी
तुम्हारी याद में खोना।
तुम्हारे ख्वाब में जगना
तुम्हारी नींद में सोना।।
मगर फिर हर घड़ी मुंह
फेरकर वो बैठ जाने की।
तुम अपनी बेरुखी लिखना और
मेरी जिद की हद लिखना।।
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न जाने प्यार था, व्यापार था
लाचार था ये मन।
उधर संसार था, इस पार था
बेकार सा जीवन।।
कभी बैठो कलम लेकर
जो मन के तार पर लिखने।
वो स्वप्‍नों के बही खाते
वो साखी, वो सबद लिखना।।
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कहां मैं सीख पाया था
वो शब्दों के महल बोना।
असल था प्यार वो मेरा
था जिसके ब्याज में रोना।।
किताबों में कभी लिखना
हिसाब अपने गुनाहों का।
बहे जो ब्याज में आंसू
वो सब के सब नकद लिखना।।
बही लिखना सनद लिखना...

-अमित तिवारी
दैनिक जागरण 

नवजीवन मिल जाए (Priytama)



अधरों का चुंबन मिल जाए
मुझको नवजीवन मिल जाए
अंतर्मन के इन भावों को 
तेरा अभिनंदन मिल जाए
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मिल जाए तुझसे मिलने का 
पलभर का किस्‍सा जीवन में 
भावों का सागर सिमटेगा 
पलभर तेरे आलिंगन में 
... ....
आलिंगन में भरकर तुझको 
फिर जीवन तट छूटे तो क्‍या 
सांसों में जब तू बस जाए 
फिर सांसों की लट टूटे तो क्‍या 
....... 
तो क्‍या गर टूटे स्‍वप्‍न सभी 
जीवन के मरु सागर में 
इक प्रेम सुधा की बूंद भली 
स्‍वप्‍नों के छोटे गागर में 
....... 
गागर ये तेरे स्‍वप्‍नों का
उस क्षीर सिंधु सा पावन है
वो पल जो तुझमें बीता है 
वो पल सबसे मनभावन है 
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मनभावन है मन में तेरा 
आना, जाना, जगना, सोना 
जीवन का सारा सत्‍य यही
तेरा होना, मेरा होना 
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-अमित तिवारी 
दैनिक जागरण 
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