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एक ख्वाब ही तो है..(Its a dream only)



मेरी आँखों का वो एक ख्वाब ही तो है।
वो चेहरा नर्म-नाजुक गुलाब ही तो है।।


प्यार का हर लफ्ज उस से जुड़ता है।
वो एक मोहब्बत की किताब ही तो है।।


पास जाऊं भी तो कैसे मैं हवा सा पागल।
बुझ न जाये उम्मीदों का चराग ही तो है।।


वो मेरे सामने भी हो तो कैसे देखूंगा।
मेरी निगाह भी उसका नकाब ही तो है।।


मेरे इश्क का सवाल उसे कहूं कैसे।
वो झुकी सी नज़र मेरा जवाब ही तो है।।


उसकी तारीफ में गजलें तमाम लिखता हूँ।
वो साँस लेते हुए कोई महताब ही तो है।।

-अमित तिवारी 
समाचार संपादक
अचीवर्स एक्सप्रेस 

सच ही तो कहा उसने (Its true...)

सच ही तो कहा उसने
'तुम प्यार करना नहीं जानते'
भला ऐसे भी कोई प्यार करता है क्या?
कि नाराज़ होने का अधिकार भी न रखे...!
कहीं ऐसे भी प्यार होता है क्या..
कि कोई लाख छुडाये 
और तुम हाथ थामे खड़े रहो...
ऐसे प्यार थोड़े होता है 
कि उसने सोचा भी नहीं
और तुम दौड़े चले आये..
और ये जो तुम इस नाम की माला जपते हो ना...
कोफ़्त होती है इस से...
और हाँ, जिसे ज़िन्दगी में आना ही नहीं...
उसे ज़िन्दगी बनाये रहना !! 
अरे पागल ! ये प्यार नहीं..
पागलपन है....!
और फिर उसकी वही निर्दोष सी खिलखिलाती हंसी...
(जिस पर हमेशा मुझे प्यार आता है...)
और मैं बेबस ये भी न कह सका 
कि 
सच ही तो कहा उसने..
'मैं प्यार करना नहीं जानता' 

-अमित तिवारी
समाचार संपादक
अचीवर्स एक्सप्रेस 

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