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डीडीसीए का ड्रम (DDCA Drum)




अरविंद केजरीवाल कहते बहुत कुछ हैं, लेकिन करते कितना हैं, इसका कोई पैमाना नहीं है। इस बार उनके आरोपों का पैमाना छलका है वित्‍त मंत्री अरुण जेटली पर। केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी का कहना है कि अरुण जेटली के कार्यकाल के दौरान डीडीसीए में जमकर धांधली हुई और इस बात के पुख्‍ता सुबूत भी उनकी पार्टी के पास हैं। यही नहीं, उन्‍होंने डीडीसीए में यौन शाेषण का मुद्दा भी उठाया है। 
डीडीसीए का ड्रम बजाकर उनकी पार्टी कुछ दिनों से राजनीति में नई हलचल पैदा किए हुए है। देखना दिलचस्‍प होगा कि इन सुबूतों में और दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ सुबूतों में कितनी समानता है। सरकार में आने से पहले तक केजरीवाल और उनकी पार्टी ने बढ़-चढ़कर शीला दीक्षित के खिलाफ 300 से ज्‍यादा पन्‍नों के सुबूत होने का दावा किया था लेकिन सरकार में आने के बाद जब कार्यवाही की बात हुई तो उन्‍होंने उल्‍टा पत्रकारों को ही सुबूत लाने की जिम्‍मेदारी दे दी। फिलहाल केजरीवाल एक बार फिर कई पन्‍नों के सुबूत अरुण जेटली के खिलाफ होने का दावा कर रहे हैं। एक ओर जब सुब्रमण्‍यन स्‍वामी दस्‍तावेजों के दम पर हेराल्‍ड मामले में कांग्रेस की अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को अदालत में हाजिर होने के लिए मजबूर कर देते हैं तो यह प्रश्‍न हर आम आदमी के दिमाग में आता है कि आखिर केजरीवाल अपने सुबूतों को लेकर अदालत के पास क्‍यों नहीं जाते। क्‍या केजरीवाल को नहीं पता कि प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में सुबूत लहराने और आरोप लगाने से किसी को ना तो दोषी ठहराया जा सकता है और ना उसे सजा दी जा सकती है। दूसरी ओर जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मामला दायर कर दृश्‍य को और रोमांचक बना दिया है। जेटली केंद्र सरकार के ऐसे मंत्री हैं जो जमीनी स्‍तर पर जनता के बीच सबसे कम लोकप्रिय माने जा रहे हैं। इसके बावजूद भाजपा उनको लेकर झुकने की तैयारी में नहीं दिखाई दे रही। जेटली के मामले में कीर्ति आजाद का मोर्चा खोलना भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी करने वाला है। पार्टी से निलंबन के बाद भी अाजाद के तेवर में कोई बदलाव नहीं आता दिख रहा है। सारे समीकरणों को देखते हुए गेंद फिलहाल केजरीवाल के पाले में दिख रही है लेकिन इस बात की उम्‍मीद कम ही है कि वो कोई गोल कर पाएंगे। 
- अमित तिवारी 

बहुत अब हो गया (Its Enough)



बहुत अब हो गया किस्सा
मनाने रूठ जाने का।
फकत अब वक़्त आया है
किसी ताज़ा बहाने का।।
हमीं से अब छुपाते हो 
तुम अपने दिल की लाचारी।
कि अब तो छोड़ भी दो तुम 
ये किस्‍सा आजमाने का।।
किसी के साथ हंसने का
तरीका अब पुराना है।
कोई देखो तरीका तुम
नया दिल काे जलाने का।।
तुम्‍हें तितली कहूं, या फूल 
या गुल या कहूं गुलशन।
तुम्‍हीं कह दो तरीका अब
खुद ही तुमको बुलाने का।।
अब तुम भूल जाओ वो 
तुम्‍हारी याद में रोना।
कि गुजरा वक्‍त है अब 
वक्‍त वो आंसू बहाने का।।
चमकता चांद जो देखा है 
तुमने आसमां में कल।
उसी से ये हुनर सीखा है
दाग अपने दिखाने का।।

-अमित तिवारी 
दैनिक जागरण 

बस इतना हो, अच्छा हो...(Real Dream)



उसको लिखना, उसको पढना,
उस पर किस्सागोई सी।
उसमे होना, जी भर रोना,
उसमे नींदे सोयी सी।।
उसको पाना, उसको खोना,
उस बिन पल पल कट जाना।
उसकी आड़ी तिरछी सब,
रेखाओं का रट जाना।।
उसका कहना, उसका रहना,
उसकी आँखों के मोती।
अब भी जान नहीं पाया,
बिन उसके साँसे कब होती।।
कह दूँ उसको छोड़ चुका हूँ,
फिर कैसे मैं जिंदा हूँ।
उसकी आँखें नम आखिर क्यूँ?
मैं अब भी शर्मिंदा हूँ।।
उसके वादे, उसके गीत,
उस चेहरे पर मेरी जीत।
उसकी खातिर सपने सारे,
उसकी खातिर सुर-संगीत।।
उसको सुनना, उसको गुनना,
उसकी धुन में खो जाना।
उसकी पलकों के साये में,
मेरे सपनों का सो जाना।।
उससे कह दूं दिल का किस्‍सा,
जैसा झूठा सच्‍चा हो।
वो हो, मैं हूं, बस कुछ सपने,
बस इतना हो, अच्‍छा हो...
बस इतना हो, अच्‍छा हो... 
- अमित तिवारी 
दैनिक जागरण 

प्रतिभा पहचान की मोहताज नहीं होती





लड़कियां वैसे तो हर क्षेत्र में लड़कों को चुनौती दे रही हैं, लेकिन जब बात फैशन की हो तो लड़कों से कई कदम आगे दिखाई देती हैं। लाजपत नगर के साउथ दिल्‍ली पॉलिटेक्निक फॉर वुमेन में आयोजित वार्षिक फैशन प्रजेंटेशन शो में कॉलेज की लड़कियों ने अपनी इसी प्रतिभा का मुआयना कराया। 'रिफ़लेक्‍शन' के नाम से आयोजित इस प्रजेंटेशन में लड़कियों ने अपने आसपास और प्रकृति को आधार बनाकर तरह-तरह के डिजाइन पेश किए। 18 अलग-अलग फैशन सिक्‍वेंस में स्‍थापित फैशन डिजाइनरों को मात देती 36 युवा फैशन डिजाइनर लड़कियों ने दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। सोने पर सुहागा का काम किया इन डिजाइनरों की मेहनत को रैम्‍प पर सबके सामने लाने वाली 108 मॉडल लड़कियों ने। रैम्‍प पर लड़कियों का आत्‍मविश्‍वास किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम था। इस मौके पर अध्‍यापिका शिल्‍पा अबी ने बताया कि छात्राओं का उत्‍साह बढ़ाने के लिए कॉलेज ऐसी गतिविधियों को प्रोत्‍साहन देता है। कॉलेज की निदेशक आशिमा चौधरी ने अध्‍यापिकाओं और छात्राओं की मेहनत की सराहना की। आमतौर मैं रिपोर्ताज को ब्‍लॉग का हिस्‍सा नहीं बनाता, लेकिन कॉलेज के प्रयास और लड़कियों की प्रतिभा ने ऐसा करने पर मजबूर कर दिया। 'साउथ दिल्‍ली पॉलिटेक्निक फॉर वुमेन' दिल्‍ली में फैशन डिजाइनिंग एंड मर्चेंडाइजिंग सेक्‍टर को अकेडमिक प्रोग्राम का हिस्‍सा बनाने वाला अपनी तरह का पहला संस्‍थान है। यहां 18 अलग-अलग विधाओं में वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाती है। कॉलेज की कोशिश को सलाम तो बनता है। 

-अमित तिवारी 
दैनिक जागरण

बही लिखना, सनद लिखना (My Love)



बही लिखना, सनद लिखना
मेरी चाहत का कद लिखना।
मेरी बातों को तुम कीकर
और अपने लब शहद लिखना।।
..................
तुम्हें पाना नहीं फिर भी
तुम्हारी याद में खोना।
तुम्हारे ख्वाब में जगना
तुम्हारी नींद में सोना।।
मगर फिर हर घड़ी मुंह
फेरकर वो बैठ जाने की।
तुम अपनी बेरुखी लिखना और
मेरी जिद की हद लिखना।।
...........
न जाने प्यार था, व्यापार था
लाचार था ये मन।
उधर संसार था, इस पार था
बेकार सा जीवन।।
कभी बैठो कलम लेकर
जो मन के तार पर लिखने।
वो स्वप्‍नों के बही खाते
वो साखी, वो सबद लिखना।।
..............
कहां मैं सीख पाया था
वो शब्दों के महल बोना।
असल था प्यार वो मेरा
था जिसके ब्याज में रोना।।
किताबों में कभी लिखना
हिसाब अपने गुनाहों का।
बहे जो ब्याज में आंसू
वो सब के सब नकद लिखना।।
बही लिखना सनद लिखना...

-अमित तिवारी
दैनिक जागरण 

नवजीवन मिल जाए (Priytama)



अधरों का चुंबन मिल जाए
मुझको नवजीवन मिल जाए
अंतर्मन के इन भावों को 
तेरा अभिनंदन मिल जाए
.......
मिल जाए तुझसे मिलने का 
पलभर का किस्‍सा जीवन में 
भावों का सागर सिमटेगा 
पलभर तेरे आलिंगन में 
... ....
आलिंगन में भरकर तुझको 
फिर जीवन तट छूटे तो क्‍या 
सांसों में जब तू बस जाए 
फिर सांसों की लट टूटे तो क्‍या 
....... 
तो क्‍या गर टूटे स्‍वप्‍न सभी 
जीवन के मरु सागर में 
इक प्रेम सुधा की बूंद भली 
स्‍वप्‍नों के छोटे गागर में 
....... 
गागर ये तेरे स्‍वप्‍नों का
उस क्षीर सिंधु सा पावन है
वो पल जो तुझमें बीता है 
वो पल सबसे मनभावन है 
.....
मनभावन है मन में तेरा 
आना, जाना, जगना, सोना 
जीवन का सारा सत्‍य यही
तेरा होना, मेरा होना 
.........

-अमित तिवारी 
दैनिक जागरण 
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