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Friday, April 8, 2011

दिल फिर भी जीत नहीं पाए (Still alone..!)



गीत, ग़ज़ल, कविताई करके
जीवन जीत नहीं पाए..
हार गए सब लफ्ज़ मगर
दिल फिर भी जीत नहीं पाए

वो कब जीते, हम कब हारे..
कब टूटे सपनो के तारे ?
कब हमने उनसे सत्य कहा
कब झूठ समझ पाए सारे ?
पल-पल कर जीवन रीत गया..
पर सपने रीत नहीं पाए..
दिल फिर भी जीत नहीं पाए..

दिल की बातें जंग हुईं कब.. 
तसवीरें बदरंग हुईं कब ?
कब हँसना-खिलना छूट गया..
नम आँखें अपने संग हुईं कब ?
हर किस्सा हमने कह डाला..
लेकिन वो गीत नहीं गाये..
दिल फिर भी जीत नहीं पाए...


- अमित तिवारी
समाचार संपादक
निर्माण संवाद

(तस्वीर गूगल सर्च से साभार )

7 comments:

  1. दिल की बातें जंग हुईं कब..
    तसवीरें बदरंग हुईं कब ...

    बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति...

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  2. उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कैलाश सर..

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  3. दिल की बातें जंग हुईं कब..
    तसवीरें बदरंग हुईं कब ?
    कब हँसना-खिलना छूट गया..
    नम आँखें अपने संग हुईं कब ?

    मन के भावों को बखूबी लिखा है ...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  4. बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति|धन्यवाद|

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  5. कब झूठ समझ पाए सारे ?
    पल-पल कर जीवन रीत गया..
    पर सपने रीत नहीं पाए..
    दिल फिर भी जीत नहीं पाए..

    सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  6. बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

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  7. अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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