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दिल फिर भी जीत नहीं पाए (Still alone..!)



गीत, ग़ज़ल, कविताई करके
जीवन जीत नहीं पाए..
हार गए सब लफ्ज़ मगर
दिल फिर भी जीत नहीं पाए

वो कब जीते, हम कब हारे..
कब टूटे सपनो के तारे ?
कब हमने उनसे सत्य कहा
कब झूठ समझ पाए सारे ?
पल-पल कर जीवन रीत गया..
पर सपने रीत नहीं पाए..
दिल फिर भी जीत नहीं पाए..

दिल की बातें जंग हुईं कब.. 
तसवीरें बदरंग हुईं कब ?
कब हँसना-खिलना छूट गया..
नम आँखें अपने संग हुईं कब ?
हर किस्सा हमने कह डाला..
लेकिन वो गीत नहीं गाये..
दिल फिर भी जीत नहीं पाए...


- अमित तिवारी
समाचार संपादक
निर्माण संवाद

(तस्वीर गूगल सर्च से साभार )

7 comments:

Kailash C Sharma said...

दिल की बातें जंग हुईं कब..
तसवीरें बदरंग हुईं कब ...

बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति...

Amit Tiwari said...

उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कैलाश सर..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दिल की बातें जंग हुईं कब..
तसवीरें बदरंग हुईं कब ?
कब हँसना-खिलना छूट गया..
नम आँखें अपने संग हुईं कब ?

मन के भावों को बखूबी लिखा है ...सुन्दर अभिव्यक्ति

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति|धन्यवाद|

संजय भास्कर said...

कब झूठ समझ पाए सारे ?
पल-पल कर जीवन रीत गया..
पर सपने रीत नहीं पाए..
दिल फिर भी जीत नहीं पाए..

सुन्दर भावमयी अभिव्यक्ति...

संजय भास्कर said...

बहुत दिनों बाद इतनी बढ़िया कविता पड़ने को मिली.... गजब का लिखा है

संजय भास्कर said...

अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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