...........................

सम-विषम दिल्ली (Odd-Even Delhi)



देश की राजधानी दिल्‍ली इन दिनों सम-विषम के कारण चर्चा में है। स्‍कूली पढ़ाई के दिनों में जिन बच्‍चों ने गणित को हाथ लगाने से तौबा कर ली थी, उन्‍हें भी आजकल गणित के इस मूल पाठ को याद करना पड़ रहा है। 
मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्‍व में आम आदमी पार्टी की सरकार ने राजधानी में पर्यावरण की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए तारीख के आधार पर सड़क पर दौड़ने वाली गाडि़यों के निर्धारण की नीति साल की शुरुआत से लागू की है। व्‍यवस्‍था पूरी तरह प्रायोगिक स्‍तर ही लागू हुई है लेकिन चर्चा जोरों पर है। राज्‍य सरकार पहले दिन से ही अपनी पीठ थपथपाने में लगी है तो विरोधी व्‍यवस्‍था की कमियां गिनाने में व्‍यस्‍त हैं। आम जनता की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। 
इस व्‍यवस्‍था को मुख्‍य तौर पर पर्यावरण की दृष्टि से लागू किया गया है लेकिन आम जनता इस व्‍यवस्‍था के तहत सड़क पर जाम से राहत और बसों के बढ़े फेरे को लेकर ज्‍यादा खुश है। वैसे भी प्रदूषण के इतने कारण हैं कि सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक चुनिंदा निजी गाडि़यों पर रोक लगाकर इस पर बहुत ज्‍यादा काबू पाने की उम्‍मीद करना भी बेमानी सा है। शुरुआती दिनों की रिपोर्ट भी यही कह रही है कि सड़कों पर गाडि़यां तो सम-विषम के हिसाब से ही चल रही हैं, लेकिन प्रदूषण के स्‍तर पर ज्‍यादा फर्क नहीं दिखा है। 

दूसरी ओर विरोधी इस व्‍यवस्‍था को लेकर तमाम तर्क दे रहे हैं। सबसे वाजिब तर्क है दिल्‍ली की परिवहन व्‍यवस्‍था का। सार्वजनिक परिवहन की व्‍यवस्‍था को मजबूत और सुगम किए बिना ऐसी कोई भी व्‍यवस्‍था लंबे समय तक कारगर नहीं हो सकती। केजरीवाल स्‍पष्‍ट कर चुके हैं कि यह अस्‍थायी व्‍यवस्‍था है और सफल रहने पर भी इसे स्‍थायी नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान के पीछे की गहराई को समझा जा सकता है। राज्‍य सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपाए लेकिन उसे भी इतना अंदाजा है कि हफ्ते-दस दिन के लिए ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को लागू करने और उसे स्‍थायी करने में कितना फर्क है। बहरहाल, सड़क पर सार्वजनिक परिवहन के भरोसे चलने वाली जनता जाम मुक्‍त रास्‍ते और बढ़ी बसों से खुश है और उसे यह भी पता है कि यह सिर्फ चार दिन की चांदनी ही है।
- अमित तिवारी 

1 comments:

GST Impact Analysis said...

I certainly agree to some points that you have discussed on this post. I appreciate that you have shared some reliable tips on this review.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...