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काली सुबह लिखूं... उजाली रात पर लिखूं...

हालात पर लिखूं या ज़ज्बात पर लिखूं
दुनिया के वाहियात खयालात पर लिखूं
या लिखूं मैं यार-तुम और जाम की बातें,
काली सुबह लिखूं, उजाली रात पर लिखूं


या लिखू कि देश घायल सा पड़ा है,
या कहूँ कि नौजवां है नींद में,
या कि कुछ पल फिर तकूँ मैं राह में
एक नए सूरज कि इक उम्मीद में...


हीर राँझा की नयी अठखेलियाँ
फिर सीरी-फरहद का रोमांस हो,
फिर कहानी का धरातल हो नया
फिर से लिखने का नया इक चांस हो..


देश दिल धड़कन ज़माना
सब है अपना, पन बेगाना..
प्यार दिल एहसास थकता..
हर घडी विश्वास थकता..


क्या किस्सा छोडूं, कौन सी बात पर लिखूं...
काली सुबह लिखूं उजाली रात पर लिखूं...


-अमित तिवारी
समाचार संपादक
निर्माण संवाद
(तस्वीर गूगल सर्च से साभार)

9 comments:

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष said...

अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

Surendra Singh Bhamboo said...

ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

दीपक 'मशाल' said...

हिन्दी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है दोस्त.. ऐसे ही लिखते रहिये..

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर रचना धन्यवाद|

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

RAVINDRA said...

प्रशंशनिये
आपकी सोच और कविता ,दोनों ही

संगीता पुरी said...

इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

Umra Quaidi said...

सार्थक लेखन के लिये आभार एवं “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव भी जीते हैं, लेकिन इस मसाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये यह मानव जीवन अभिशाप बन जाता है। आज मैं यह सब झेल रहा हूँ। जब तक मुझ जैसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यही बडा कारण है। भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस षडयन्त्र का शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल दो मिनट का समय हो तो कृपया मुझ उम्र-कैदी का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आप के अनुभवों से मुझे कोई मार्ग या दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये।

http://umraquaidi.blogspot.com/

आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”

ललित शर्मा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई
ब्लाग जगत में आपका स्वागत है
आशा है कि अपने सार्थक लेखन से ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

भिलाई में मिले ब्लागर

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